Prabhat Kumar

गुप्त साम्राज्य

लेखक

प्रभात कुमार

गुप्त राजवंश

गुप्त वंश की स्थापना श्रीगुप्त घटोत्कच
चन्द्रगुप्त प्रथम समुद्रगुप्त रामगुप्त
चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य कुमारगुप्त प्रथम स्कन्दगुप्त
पुरुगुप्त कुमारगुप्त द्वितीय बुधगुप्त
नरसिंहगुप्त बालादित्य कुमारगुप्त तृतीय गुप्त साम्राज्य का पतन

गुप्त वंश की स्थापना

गुप्त साम्राज्य का उदय तीसरी सदी के अंत में प्रयाग के निकट कौशाम्बी में हुआ। गुप्त कुषाणों के सामंत थे। मौर्य वंश के पतन के बाद दीर्घकाल तक भारत में राजनीतिक एकता स्थापित नहीं रही। कुषाण एवं सातवाहनों ने राजनीतिक एकता लाने का प्रयास किया। मौर्योत्तर काल के उपरान्त तीसरी शताब्दी इ. में तीन राजवंशो का उदय हुआ जिसमें मध्य भारत में नाग शक्ति, दक्षिण में बाकाटक तथा पूर्वी में गुप्त वंश प्रमुख हैं। मौर्य वंश के पतन के पश्चात नष्ट हुई राजनीतिक एकता को पुनस्थापित करने का श्रेय गुप्त वंश को है। गुप्त साम्राज्य की नींव तीसरी शताब्दी के चौथे दशक में तथा उत्थान चौथी शताब्दी की शुरुआत में हुआ। गुप्त वंश का प्रारम्भिक राज्य आधुनिक उत्तर प्रदेश और बिहार में था। गुप्त वंश की स्थापना महाराजा गुप्त ने लगभग 240 ई.में की थी

गुप्त वंश के शासक

श्रीगुप्त

घटोत्कच

चन्द्रगुप्त प्रथम

समुद्रगुप्त रामगुप्त

चन्द्रगुप्त द्वितीय

विक्रमादित्य

कुमारगुप्त प्रथम

स्कन्दगुप्त पुरुगुप्त

कुमारगुप्त द्वितीय

बुधगुप्त

नरसिंहगुप्त बालादित्य

कुमारगुप्त तृतीय

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