
राग धनाश्री
ऐसी रिस तोकौं नँदरानी |
बुद्धि तेरैं जिय उपजी बड़ी, बैस अब भई सयानी ||
ढोटा एक भयौ कैसैहूँ करि, कौन-कौन करबर बिधि भानी ||
क्रम-क्रम करि अब लौं उबर्यौ है, ताकौं मारि पितर दै पानी ||
को निरदई रहै तेरैं घर, को तेरैं सँग बैठे आनी |
सुनहु सूर कहि-कहि पचि हारीं , जुबती चलीं घरनि बिरुझानी ||
भावार्थ :-- (गोपियाँ कहती हैं -) `नन्दरानी! तुममें इतना क्रोध है ? कब तुम्हारे
हृदयमें बुद्धि आवेगी ? तुम्हारी अवस्था बड़ी है (तुम बूढ़ी हो चली हो ) और वैसे भी
तुम समझदार हो | पता नहीं कौन-कौनसे संकट विधाताने काटे हैं और किसी प्रकार
तुम्हारे एक पुत्र हुआ | क्रमशः (अनेक विपत्तियों से) वह अबतक बचता रहा,
अब उसीको मारकर अपने पितरोंको जल दे लो | कौन इतनी निर्दय है जो तुम्हारे घर रहे और
कौन तुम्हारे पास आकर बैठे |' सूरदासजी कहतेहैं कि गोपियाँ कह-कहकर, प्रयत्न करके
जब थक गयीं (और यशोदाजीने श्यामको नहीं छोड़ा) तब वे अप्रसन्न होकर अपने घरोंको चली
गयीं|
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217