वार्षिक राशिफल, भविष्यफल 2014

वार्षिक राशिफल 2014

 

मेष राशि


मेष राशि वालों के लिए यह वर्ष शुभाशुभ मिश्रित फल देने वाला है। स्वर्णपाद से शनि देव का आगमन अत्यंत श्रम संघर्ष के शाथ शुखद और शुभ रहेगा। सप्तम शनि सामान्यतया उत्तम रहेगा। आर्थक स्थिति सुदृढ़ होगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। रोजी-रोजगार में उतार-चढ़ाव की स्थितियाँ बनेगी। स्वर्णपाद से तृतीय गुरू आय से अधिक व्यय में वृद्धि करेंगे। रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। पारिवारिकजनों का सहयोग मिलेगा। व्यर्थ के वाद-विवाद होंगे। मानसिक चिन्ताओं का सामना करना पड़ेगा। गुरूजनों से लाभ होगा। सप्तम राहु पारिवारिकजनों के कष्टों में वृद्धि करेगा। किसी वृद्ध व्यक्ति से विछोह की स्थिति बन सकती है।

वृष राशि

ताम्रपद से षष्ठस्थ शनि का आगमन शुभद है विद्या, धन, रोजी-रोजगार में सामान्य लाभ, पुरातत्व-सम्पत्ति का लाभ होगा। पारिवारिक सुख-समृद्धि की वृद्धि, इच्छित कार्यों में श्रमानुसार लाभ प्राप्त होगा। धार्मिक कार्यों में रुचि की वृद्धि होगी। द्वितीय गुरू का ताम्रपद से आगमन शुभाशुभ मिश्रितफल देने वाला है। पारिवारिक जनों से सहयोग, पत्नी व संतान से सुख, श्रम-संघर्ष से द्रव्य लाभ, मान-सम्मान की वृद्धि होगी। धैर्य, साहस, गंभीरता, सहनशीलता का मार्ग अपनाये। रोजी-रोजगार में उन्नति के मार्ग खुलेंगे। तृतीय गुरू मिश्रित फल कारक है सामाजिक पद-प्रतिष्ठा की वृद्धि होगी। रूके हुए कार्यों की पूर्ति होगी। राहु बिगड़े हुए कार्यों को बनायेंगे।

मिथुन राशि

रजतपाद से पंचमस्थ शनि का आगमन शुभफल दायक है। श्रमानुसार सफलता प्राप्त होगी। आरोग्य सुख, धनागमन हेतु स्वाभाविक चिन्ताएँ, हर क्षेत्र में सामान्य लाभ होगा। स्वर्णपाद से जन्मस्थ गुरू शुभ है। शारीरिक स्वास्थ्य में लाभ मिलेगा। मन कुछ विचलित रहेगा। उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में नवीन समस्या उत्पन्न होगी। छात्रों को परीक्षा प्रतियोगिता उचित परिणाम मिलेंगे। पत्नी व संतान से सुख प्राप्त होगा। पंचम राहु संतान पक्ष से असंतोष, व्यर्थ की भाग-दौड़ से मन में खिन्नता रहेगी। एकादश केतु व्यापार में उन्नति करेगा। भूमि-भवन आदि का सुख प्राप्त होगा।

कर्क राशि

लौहपाद से चतुर्थ शनि का आगमन शुभफल दायक है शनि की लघु कल्याणी ढैय्या चल रही है जोकि अत्यन्त कष्टकारक है। पत्नी, संतान से कष्ट, दिनचर्या अस्त-व्यस्त रहेगी। मानसिक क्लेश, विश्वासी जनों से धोखा, असंतोष की भावना, मित्रों से असहयोग की भावना, लौहपाद से द्वितीय गुरू का आगमन मिश्रित फल देने वाला है। मानसिक तनाव में वृद्धि उत्पन्न होगी। चतुर्थ राहु व्यापक कष्ट पैदा करेगा। प्रियजनों से विछोह। दशमस्थ केतु शुभ है रूके हुए कार्य पूर्ण होंगे। नवमस्थ केतु अशुभ रहेगा। अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

सिंह राशि


ताम्रपद से तृतीय शनि शुभ है। यह जातक के लिए प्रभावशाली सिद्ध होगा। भाईयों में आपसी मेल-जोल स्थापित होगा। सामाजिक स्थितियाँ सुदृढ़ होगी। सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। लौहपाद से द्वादश गुरूदेव का आगमन मिश्रितफल प्रदान करने वाला होगा। पुरूषार्थ में कमी मानसिक तनाव में वृद्धि, मान-सम्मान व सहयोग की पूर्ति होगी। रोजी-रोजगार में उन्नति होगी। मानसिक तनाव का सामना करना पड़ेगा। ऋण सम्बन्धी समस्याओं से बचें। चौराग्नि, भय, दाम्पत्य जीवन में तनाव बढ़ायेंगे। केतु मुकदमों आदि में परेशानी उत्पन्न करेंगे। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता मिल सकती है। परिश्रम पर ध्यान दें।

कन्या राशि

द्वितीय शनि का आगमन श्रम-संघर्ष से युक्त कष्टकारी सिद्ध होगा। साढ़ेसाती के अन्तर्गत पैर पर शनि की धैय्या चलेगी। साहस की कमी अधिक प्रयत्न से अल्प लाभ, पारिवारिक जनों से क्लेश की स्थिति बनेगी। सामाजिक मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा की हानि। दशमस्थ गुरू का स्वर्णपाद से आगमन मिश्रितफल देने वाला है। रोजी-रोजगार में चल रहे प्रयास सफल होंगे। वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें। व्यर्थ की भाग-दौड़ का सामना करना पड़ सकत है। विश्वासी जनों से धोखा, राजनैतिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

तुला राशि


रजतपाद से गुरू का आगमन मिश्रितफलकारक है। श्रेष्टजनों की संगति प्राप्त होगी। राजनैतिक सफलता, पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति, मानसिक कष्ट, पारिवारिक सुख में कमी, रोजी-रोजगार में बाधा उत्पन्न होगी, प्रियजनों से विछोह की स्थिति बनेगी। दशमस्थ गुरू रोजी-रोजगार में वृद्धि करेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। व्यर्थ की भागदौड़ का सामना करना होगा। मानसिक समस्याओं के साथ पारिवारिकजनों से क्लेश से मन खिन्न रहेगा। राहु दुर्घटना आदि का भय, मानसिक क्लेश उत्पन्न करेगा, प्रियजनों से विछोह की स्थिति बनेगी। मान-सम्मान की हानि। सप्तम राहु के कारण पत्नी को रोग एवं सगे भाई-बहनों से विद्रोह की स्थिति बनेगी।

वृश्चिक राशि


लौहपाद से द्वादश शनि का आगमन अशुभ फलदायक है। साढ़ेसाती के अन्तर्गत सिर पर चढ़ती शनि की ढैय्या रहेगी। व्यय की अधिकता आर्थिक अवरोध, स्वजनों से क्लेश, चौराग्नि, भय, अघात, प्रत्यागत, राजकीय कष्ट नाना प्रकार की पारिवारिक परेशानियाँ खड़ी हो सकती है। गुरू मिश्रित फलकारक है। जो अत्यधिक श्रम संघर्ष से अल्प लाभ देगा। व्यय की अधिकता में कमी। सामाजिक पद-प्रतिष्ठा की हानि, वाद-विवाद, मुकदमें आदि में असफलता , कष्टप्रद यात्रायें। तीर्थयात्रा के अवसर प्राप्त होगें। शारीरिक कष्ट, उदर रोग, सिर, पैर, हृदय रोगों को राहु वृद्धि करेंगे। केतु व्यापारिक क्षेत्रों चल रहे प्रयास में वृद्धि करेंगे।

धनु राशि


ताम्रपाद से एकादश शनि देव का आगमन सुख-समृद्धि फलदायक होगा। पारिवारिक उत्तरदायित्वों की पूर्ति होगी। धर्म अध्यात्म की ओर रूचि बढ़ेगी, सहोदर भाईयों से लाभ और प्रीति, सुख साधनों में वृद्धि होगी। वाद-विवाद, मुकदमा, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलेगी। कर्म शक्ति का विकास होगा। इस वर्ष गुरू अत्यधिक श्रम-संघर्ष से अल्पलाभ करायेंगे। व्यय की अधिकता, आय में कमी, सामाजिक मान-सम्मान में कमी रहेगी, वाद-विवाद से बचें, व्यर्थ की यात्रायें करनी पड़ सकती है। राहु सामाजिक और पारिवारिक मान-सम्मान को बढ़ायेंगे। रोजी-रोजगार के मार्ग खुलेंगे। केतु पारिवारिक उलझनों में बढ़ोत्तरी करेगा।

मकर राशि


रजतपाद से दशमस्थ शनि का आगमन लाभकारी एवं सफलता दायक सिद्ध होगी। भाग्यकर्म प्रारब्ध का उत्तम सहयोग, आर्थक लाभ, नैतिक सुख-सुविधाओं की वृद्धि, यात्रायें सुखद होगी, स्वावलम्बन शक्ति, स्वाभिमान की रक्षा, संकल्पित कार्य पूर्ण होंगे। उच्चाधिकारियों से सहयोग प्राप्त होगा। गुरूदेव कुछ विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न करेगा। पारिवारिक क्लेश की स्थितियाँ बनेगी। मान सम्मान की हानि, अनचाहि यात्राओं से कष्ट, सामाजिक व व्यापारिक क्षेत्रों में चल रहा प्रयास सफल होगा। राहु थोड़ी राहत उत्पन्न करेंगे। सुख, सम्मान में वृद्धि, उन्नति की वृद्धि होगी, मित्रों व परिवार से सहयोग प्राप्त होगा। केतु गृह कलह और मानसिक कष्ट में वृद्धि करेगा।

कुंभ राशि


स्वर्णपाद से नवमस्थ शनि का आगमन अनिष्ट फलकारक है। दैनिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। रोजी-रोजगार, व्यापार में उतार चढ़ाव की स्थितियाँ बनेगी, शारीरिक दुर्बलता, कठिन परिश्रम से कार्य सिद्धि होगी, स्त्री व कुटुम्बियों के प्रति उदासीनता होगी। बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें। गुरू पारिवारिक क्लेश की स्थितियाँ पैदा करेंगे। मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा की हानि उठानी पड़ सकती है। अनचाही कष्टप्रद यात्रायें करनी पड़ सकती है। आपके जीवन में भौतिक सुख-साधनों की पूर्ति होगी। स्वजनों का सहयोग प्राप्त होगा। पारिवारिक उत्तरदायित्व की पूर्ति होगी। मन कुछ खिन्न व परेशान रहेगा।

मीन राशि


लौहपाद से अष्टम शनि का आगमन अशुभ फलदायक है। शनि की लघुकल्याणी ढैय्या भी बाधायें भी लायेंगी, शारीरिक स्वास्थ्य में अति सावधानी बरतें, पारिवारिकजनों से क्लेश की स्थिति पैदा होगी। मानसिक कष्ट, रोजी-रोजगार में विफलता, आर्थिक रूप से परेशानी, आपके स्वभाव में परिवर्तन लायेगा। गुरूदेव रोजी-रोजगार में उन्नति के मार्ग खोलेंगे। पत्नी व संतान से मन प्रसन्न रहेगा। पारिवारिकजनों का सहयोग प्राप्त होगा। भूमि-भवन, वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा। उन्नति के मार्ग में नवीन योजनायें बनेगी। जातक के जीवन में भौतिक सुख-साधनों की पूर्ति होगी। अत्यधिक श्रम से व्यापार व रोजी-रोजगार में अल्प लाभ प्राप्त होगा। मानसिक चिन्ताएँ बढ़ेंगी

 

बारह राशि का मासिक भविष्यफल

 

 

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