तेलों में छिपे गुण का लाभ लें

 

हमारे शरीर के विकास के लिये अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है तेल कैलोरी का एक मुख्य व ठोस स्त्रोत है। बच्चों को इसकी जरूरत करीब- करीब अठारह बीस साल की उम्र तक अधिक होती है इसके बाद अतिरिक्त तेल का जरूरत धीरे धीरे कम पडती जाती है और अगर फिर भी आप लगातार अधिक तेल इस्तेमाल करते रहे तो मोटापे के साथ-साथ और कई बीमारियों के शिकार हो सकते है ।

 
कारण तेल में होने वाले कोलेस्ट्रॉल जो हमारे लिये नुकसाल दायक होता है । ज्यादातर सभी तेलों की फूड़वैल्यू एक जैसी होती है । तेल का मेडिकल नाम ट्रइग्लाइसराइड हैं । तेल अपने में खुद बेस्वाद होता है परंतु सब्जियों में स्वाद उसमें डाले गये मसाले तथा नमक के कारण होता है ।
 

 

जैतून का तेल-

जैतून का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है। इससे अगर आप महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।

सरसों का तेल-

सरसों का तेल मालिश करने पर शरीर के रक्त संचार को बढ़ाता है। थकान दूर करता है। नवजात शिशु एवं प्रसूता की मालिश इसी तेल से करनी चाहिए। सर्दियों में इस तेल की मालिश लाभदायक है। सरसों के तेल को पैर के तलुओं में सुखाने से थकान तुरंत मिटती है तथा नेत्रज्योति बढ़ती है। दाद, खाज, खुजली जैसे चर्म रोग से निजात पायी जा सकती है। चर्म रोग पर सरसों का तेल, आक का तेल, हल्दी डाल कर गर्म करें। ठंडा हो जाने पर लगायें। सरसों का तेल गुनगुना कर पिंडलियों पर लगायें, दर्द ठीक हो जायेगा। गठिया पर सरसों के तेल से मालिश करने पर आराम मिलता है।

सरसों का तेल नियमित रूप से बालों पर लगाते रहने से बाल समय से पहले सफेद नहीं होते। सरसों के तेल में सेंधा नमक डाल कर मसूड़ों की मालिश करें। पायरिया ठीक होगा। मसूड़ों से खून आना बंद होगा। बच्चों या बड़ों को जुकाम हो जाये, तो तेल में लहसुन पका कर तेल वापस थोड़ा ठंडा होने पर सीने पर मालिश करें। सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है।

राई का तेल-

राई का तेल निमोनिया रोग से बचाव करता है। इस तेल की हल्की-हल्की मालिश कर के गुनगुनी धूप लें। इस तरह नियमित रूप से करने पर निमोनिया में फायदा होता है।

नारियल का तेल-

नारियल के तेल में कपूर मिला कर यदि त्वचा पर लगायें, तो दाद, खाज, खुजली की शिकायत दूर होती है। यदि त्वचा जल जाये, तो तुरंत नारियल का तेल उस पर लगायें, निशान नहीं पड़ेगा। उस पर कुछ दिनों तक लगाते रहें। यह तेल बालों के लिए भी बेहतर होता है।

आंवले का तेल-

इसमें विटामिन सी और आयरन होता है, जो बालों के लिए पोषक है। बालों के लिए आंवले का तेल बहुत अच्छा है।

नीम का तेल-

नीम के कड़वा होने के बावजूद भी उसमें अनेक गुण हैं। इसका तेल चर्म रोगों में लाभदायक है। कारण यह जीवाणुओं का नाश करता है। नीम के निंबोली का तेल गर्भ निरोधक के रूप में काम आता है। पायरिया रोग में इस तेल की कुछ बूंदें टूथ पेस्ट में डाल कर ब्रश करें। मुंह की बदबू खत्म होगी। मसूड़ों के रोग नष्ट होंगे। इसका तेल बाजार में उपलब्ध है।

तिल का तेल-

तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।

जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।

अलसी का तेल-

जिस तरह अलसी तमाम औषधीय गुणों से भरपूर है, उसी तरह इसका तेल भी महत्व रखता है। अगर त्वचा जल जाये, तो अलसी का तेल लगाने से दर्द व जलन से राहत मिलती है। इसमें विटामिन ई होता है। इसका कुष्ठ रोगियों को सेवन करना चाहिए। त्वचा पर लाभ होगा।

अरण्ड का तेल-

इस तेल से सिर पर मालिश करने पर ठंडा महसूस होता है। बालों की जड़ों को मुलायम बनाता है। अरण्ड का तेल दो चम्मच दूध में डालकर अगर सेवन करते हैं, तो कब्ज की शिकायत दूर होती है। पेट की किसी भी तकलीफ में अरण्ड का तेल दवा जैसा काम करता है। शरीर पर लगाने से त्वचा का रंग साफ होता है। इसके सेवन से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।

मूंगफली का तेल-

जिस तरह मूंगफली पौष्टिक होती है। उसी तरह उसका तेल भी लाभदायक होता है, पचने में हल्का। इसके सेवन से प्रोटीन मिलता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कंट्रोल करता है। इसलिए हृदय रोगी इसका सेवन कर सकते हैं। इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है। इसके मालिश से चर्म रोगों में आराम मिलता है।

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