सूरदास

परिशिष्ट

पदों में आये मुख्य कथा-प्रसंग

श्रीकृष्ण-चरित

मथुरानरेश उग्रसेनजी के पुत्र कंसने पिताको कारागारमें डाल दिया था और वह स्वयं
राजा बन बैठा था | उसने अपनी चचेरी बहिन देवकी और उनके पति वसुदेवजी को भी कैद
कर रखा था और उनकी संतानोंको मार दिया करता था; क्योंकि आकाशवाणीने कंसको बताया
था कि देवकीका पुत्र उसे मारेगा | देवकीके सातवें गर्भमें भगवान् शेष आये, योगमाया
ने उन्हें वसुदेवजीकी दूसरी पत्नी रोहिणीके गर्भमें पहुँचा दिया, जो उस समय गोकुल
में नन्दजीके घर रहती थीं | इस प्रकार रोहिणीजी से बलरामजी का जन्म हुआ |
देवकीके आठवें पुत्रके रूपमें स्वयं भगवान् ने अवतार लिया | योगमायाके प्रभावसे
कारागारके द्वार खुल गये | वसुदेवजी रातमें ही अपने कुमारको गोकुलमें नन्दजीकी
पत्नी यशोदाजीके पलंगपर रख आये और उसी रात उत्पन्न हुई यशोदाजीकी कन्या उठा
लाये | कंस जब इस कन्याको पटककर मारने चला, तब कन्या हाथसे छूटकर आकाशमें
चली गयी | अष्टभुजा देवीके रूपमें प्रकट होकर उसने कंससे कहा -`तेरा मारनेवाला कहीं
पैदा हो गया है |'
कंसने उसी दिन राक्षसोंको नवजात शिशुओंको मारनेकी आज्ञा दी | उसकी आज्ञासे राक्षसी 
पूतना शिशु-हत्या करती घूमती हुइ एक दिन सुन्दर नारीवेष बनाकर स्तनोंमें विष लगाये
गोकुल नन्दभवन पहुँची | वह दूध पिलाने के बहाने श्रीकृष्णचन्द्रको मार डालना चाहती
थी | श्रीकृष्णने दूधके साथ उसके प्राण भी पी लिये | पूतना मर गयी |

 

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