सूरदास
परिशिष्ट
पदों में आये मुख्य कथा-प्रसंग
मत्स्यावतार
प्रलयकालमें ब्रह्माजीके असावधान होनेपर दैत्य हयग्रीवने उनके मुखसे निकले वेदों
को हरण कर लिया और पातालमें जा छिपा | इससे व्याकुल होकर ब्रह्माजीने भगवान
की प्रार्थना की | भगवान् नारायण ने मत्स्यावतार ग्रहण किया | उन्होंने हयग्रीवको
मारकर वेदोंका उद्धार किया |
ऐसी भी कथा आती है कि किसी कल्पके अन्तमें प्रलयके समय शंखासुर नामके दैत्यने
ब्रह्माजीसे वेदोंका हरण कर लिया था | उस जल में रहनेवाले दैत्यको मत्स्यावतार धारण
करके भगवान् ने मारा |

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