Prabhat Kumar

नन्द वंश

लेखक

प्रभात कुमार

 

नन्द वंश (344 ई. पू. - 322 ई. पू.)

344 ई. पू. में महापद्यनन्द नामक व्यक्ति, ने नन्द वंश की स्थापना की । पुराणों में इसे महापद्म तथा महाबोधिवंश में उग्रसेन कहा गया है । यह नाई जाति का था ।

उसे महापद्म एकारट, सर्व क्षत्रान्तक आदि उपाधियों से विभूषित किया गया है । महापद्म नन्द के प्रमुख राज्य उत्तराधिकारी हुए हैं- उग्रसेन, पंडूक, पाण्डुगति, भूतपाल, राष्ट्रपाल, योविषाणक, दशसिद्धक, कैवर्त, धनानन्द । इसके शासन काल में भारत पर आक्रमण सिकन्दर द्वारा किया गया । सिकन्दर के भारत से जाने के बाद मगध साम्राज्य में अशान्ति और अव्यवस्था फैली । धनानन्द एक लालची और धन संग्रही शासक था, जिसे असीम शक्तिल और सम्पत्ति के बावजूद वह जनता के विश्वाास को नहीं जीत सका । उसने एक महान विद्वान ब्राह्मण चाणक्य को अपमानित किया था ।

चाणक्य ने अपनी कूटनीति से धनानन्द को पराजित कर चन्द्रगुप्त मौर्य को मगध का शासक बनाया ।

महापद्मनन्द पहला शासक था जो गंगा घाटी की सीमाओं का अतिक्रमण कर विन्ध्य पर्वत के दक्षिण तक विजय पताका लहराई ।

नन्द वंश के समय मगध राजनैतिक दृष्टि से अत्यन्त समृद्धशाली साम्राज्य बन गया ।

व्याकरण के आचार्य पाणिनी महापद्मनन्द के मित्र थे ।

वर्ष, उपवर्ष, वर, रुचि, कात्यायन जैसे विद्वान नन्द शासन में हुए ।

शाकटाय तथा स्थूल भद्र धनानन्द के जैन मतावलम्बी अमात्य थे ।

 

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