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मुद्रण कला

Haren Das Angling Hours, Woodcut on paper

19 वीं सदी में कला शिक्षा में ब्रिटिश हस्तेक्षेप ने कला अभ्यासों में धर्मशासन का सृजन किया। ऑयल पेंटिंग ने पुनरुत्पादन की प्रक्रियाओं के जरिए प्रमुख ग्राफिक कला का निर्माण किया तथा तकनीक आधारित फोटोग्राफी पर भी ध्यान दिया गया। कलकत्ता में प्रिंटिंग और प्रकाशन के बढ़ते कारोबार में दृष्टांत चित्रों की मांग सृजित की तथा इसलिए 19वीं सदी और 20वीं सदी के प्रारंभिक काल में वुडकट प्रिंट का अलंकरण हुआ। इसी प्रकार, 20वीं सदी में शांतिनिकेतन में, बच्चों के लिए बंगला प्राइमर्स के पृष्ट प्रकाशन कार्यक्रम से ग्राफिक माध्यम को प्रोत्साहन मिला। शांतिनिकेतन के विशेषज्ञों ने नक्काशी, वुडकट्स एवं लिनोकट्स का सक्रिय अनुभव किया। कलकत्ता में गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट और शांतिनिकेतन में कल भावना में प्रिंटमेकिंग सुविधाएं कला शिक्षा का अहम अंग बन गई। बाद में, जैसा कि राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में कार्य से प्रदर्शित है, बड़ौदा एवं दिल्ली में कला विद्यालयों ने भी अपनी प्रिंटिंग प्रक्रिया का निर्माण किया। यद्यपि ग्राफिक आर्ट आरंभिक रूप से प्रकाशन की जरूरत को पूरा करता है मगर दीर्घकाल में यह माध्यम के रूप में अपनी क्षमता के साथ चित्रकारों को रोमांचित करता है। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय ने ऐसे कार्यों का विवेकपूर्ण संग्रह किया है।

R M Palaniappan Drawing on space by H Fligh

भारत के प्रसिद्ध लोक एवं जनजातीय जनजाति कला

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