मैसूर कला

लघुचित्र

दक्षिण भारत में चित्रकला की तंजाउर एवं मैसूर परंपराएं बेहद लोकप्रिय रही हैं। मैसूर चित्रकला शैली ने अनेक श्रेष्ठ चित्रकार दिये हैं, जिनमें से सुंदरैया, तंजावुर कोंडव्य, बी.वेंकटप्पा और केशवैय्या हैं। राजा रवि वर्मा के बनाये धार्मिक चित्र पूरे भारत और विश्व में आज भी पूजा अर्चना हेतु प्रयोग होते हैं ।
मैसूर चित्रकला में अधिक बारीकी होती है। ये कागज़ पर बनाए जाते हैं। तंजाउर की चित्रकारी लकड़ी पर फैलाए गए कपड़े पर होती है। अभिव्यक्ति के तौर पर दोनों संपन्न हैं। अधिकांशतः भक्ति भाव के उद्देश्य से पावन चरित्रों के चित्र होते हैं। चित्रित सतह, स्वतंत्र रूप से उन्नत,चूना पत्थर के निर्माण से होता है और उसे सोने के पत्तरों से संवारा जाता है। सोने के पत्तरों को उभार देने के लिए रंगीन कांच या आभूषण जड़े जाते हैं। विशिष्ट चरित्रों की चित्रकारी के नाटकीय फ्रेम पर विशेष ध्यान देना आवश्यक लगता है।

 

भारत के प्रसिद्ध लोक एवं जनजातीय जनजाति कला

top