भारतीय कला व्यवहार में सैद्धान्तिक यथार्थवाद 1870 के बाद से भारतीय कला व्यवहार में उल्लेखनीय परिवर्तन आया। इसके रूपान्तरण में कई धारक सहायक रहे। इनमें से एक धारक था लोगों की रूचि में बदलाव, जिनका झुकाव यूरोपीय सौन्दर्य शास्त्र के बढ़ते चलन के बाद यथार्थवाद की तरफ हो गया। भारत में ब्रिटिश कला विद्यालयों की स्थापना से इस प्रक्रिया को बहुत बल मिला।
Majumdar, H Untitled, Water colour and tempera इसी समय यद्यपि पस्तोन्जी बोमान्जी जैसे सैद्धान्तिक कला के पूर्व विद्यार्थी 1860 के दशक में सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में प्रशिक्षण ले रहे थे। सुदूर दक्षिण में त्रिवेन्द्रम में एक अदभुत कलाकार उभर रहा था। राजा रवि वर्मा का जन्म ट्रावनकोर रियासत के शासकों से सम्बद्ध शाही घराने में हुआ अन्य सैद्धान्तिक यथार्थवादी है-मंयोशा पीठावाला अन्टोनियो जेवियर त्रिनदाड़े, महादेव विश्वनाथ धुरंधर, सवाला राम लक्ष्मण हलदंकर, जेमिनी प्रकाश गांगुली और हेमेन्द्रनाथ मजूमदार।
Varma, Raja R Women holding a Fruit, Oil on canvas
Trinidade, A X Girl with a Vase, Oil, |