शांतिनिकेतन की कला पद्धति

Ramkinkar Baij

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1901 में शांतिनिकेतन में एक छोटे-से स्कूल की स्थापना की। आगे 1919 में उन्होंने कला के एक स्कूल 'कला भवन' की नींव रखी जो 1921 में स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय का एक हिस्सा बन गया। कलकत्ता शहर से दूर एक मनोहर स्थान पर अवस्थित कला भवन में कला प्रशिक्षण की एक वैकल्पिक पद्धति दी। इसमें स्टूडियो में बैठ कर चित्रकारी करने के बदले प्रकृति का अवलोकन करने एवं उसका एक हिस्सा बनने पर जोर दिया गया। लाल मिट्टी पर खड़े पेड़-पौधे, बदलते मौसम के रंग, जानवरों एवं चिड़ियों से भरे प्राकृतिक परिवेश ने विद्यार्थियों को कला की प्रेरणा दी और वे नंदलाल बोस जैसे दिग्गजों की देखरेख में काम करते रहे।

BB Mukherjee

आधुनिक भारतीय कला के विकास में नंदलाल सरीखे महारथियों की भूमिका उल्लेखनीय रही है। मूल भाव एवं माध्यम दोनों में कला की विभिन्न रणनीतियों का इस्तेमाल करते हुए नंदलाल बोस, बी.बी. मुखर्जी और राम किंकर बैज जैसे कलाकारों की कृतियां भारतीय चित्रकला के उस दशक का इतिहास कहती हैं जब भारत स्वाधीनता की लड़ाई में संलग्न था।

Nandalal Bose

भारत के प्रसिद्ध लोक एवं जनजातीय जनजाति कला

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