सूर्य ग्रहण

Solar Eclipse Surya Grahan

सूर्य ग्रहण सूर्य ग्रहण के तीन प्रकार
सूर्य ग्रहण 2009 कहां दिखेगा पूर्ण सूर्यग्रहण
कैसे देखें सूर्यग्रहण सूर्य ग्रहण का आपकी राशि पर असर

सूर्य ग्रहण कैसे लगता है?

सूर्य ग्रहण सूर्य का चन्द्रमा के पीछे छिप जाने की घटना को कहते हैं। यह वर्ष में एक बार ही घटती है। यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है। पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

अक्सर चाँद, सूरज के सिर्फ कुछ हिस्से को ही ढ़कता है। यह स्थिति खण्ड-ग्रहण कहलाती है। कभी-कभी ही ऐसा होता है कि चाँद सूरज को पूरी तरह ढँक लेता है। इसे पूर्ण-ग्रहण कहते हैं। पूर्ण-ग्रहण धरती के बहुत कम क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा दो सौ पचास (250) किलोमीटर के सम्पर्क में। इस क्षेत्र के बाहर केवल खंड-ग्रहण दिखाई देता है। पूर्ण-ग्रहण के समय चाँद को सूरज के सामने से गुजरने में दो घंटे लगते हैं। चाँद सूरज को पूरी तरह से, ज्यादा से ज्यादा, सात मिनट तक ढँकता है। इन कुछ क्षणों के लिए आसमान में अंधेरा हो जाता है, या यूँ कहें कि दिन में रात हो जाती है।

 

 

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